‘‘युवा साहित्यकार निशंक ने कम उम्र में राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत तमाम गीत और कविताएं रचकर राष्ट्र का सम्मान बढ़ाया है। मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि ‘निशंक’ का हिंदी से अथाह स्नेह है। एक पिछड़े क्षेत्र से होने के बावजूद मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने की उनकी छटपटाहट पर मुझे गर्व है।’’
श्री ज्ञानी जैल सिंह
श्री ज्ञानी जैल सिंह
भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति। (1984)
‘‘डाॅ. निशंक की रचनाएं पिछड़े और गरीब तबके की पीड़ा को सामने लाता है। जो समस्त विश्व के पिछड़े समाज के संघर्ष को प्रदर्शित करता है।’’
डेविड फ्राउले
डेविड फ्राउले
सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखक।
‘‘डाॅ. निशंक की रचनाओं में भारतीय संस्कृति के साक्षात दर्शन होते हैं। उनके साहित्य में एक आम आदमी के सुख-दुःख के साथ संस्कारों और भावनाओं का अच्छा मिश्रण है।’’
प्रो. तात्यानिया ओरेंसकाया
प्रो. तात्यानिया ओरेंसकाया
विभागाध्यक्ष, एफरो एशियन इंस्टीट्यूट, जर्मनी।
‘‘राजनीति में अत्यंत व्यस्त होने के बावजूद निरंतर लेखन डाॅ. निशंक की साहित्य प्रतिभा को दर्शाता है। उनका लेखन राष्ट्र और लोगों को आपस में जोड़ता है।’’
पद्मश्री रस्किन बाॅण्ड
पद्मश्री रस्किन बाॅण्ड
विख्यात साहित्यकार
‘‘डाॅ0 ‘निशंक’ जैसे रचनात्मक एवं संवेदनशील साहित्यकार को सम्मानित करते हुए मैं गर्व का अनुभव कर रहा हूँ। डाॅ0 निशंक द्वारा लिखी गई कहानियों को मैंने गंभीरता से पढ़ा। उनकी कहानियों में हिमालयी जीवन के दुःख-दर्द एवं जीवट परिस्थितियों का साक्षात प्रतिविम्ब देखा जा सकता है।
डाॅ0 नवीन रामगुलाम
डाॅ0 नवीन रामगुलाम
मा. प्रधानमंत्री, माॅरिशस गणराज्य
‘‘डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, साहित्यिक विधाओं का बेजोड़ संगम हैं। उनकी कविताएं जहां एक ओर आमजन को राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ती हैं, वहीं उनकी कहानियां पाठकों को आम आदमी के दुःख-दर्द व यथार्थता से परिचित कराती हैं। मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैं भारत के एक ऐसे व्यक्ति से मिला हूँ, जो विलक्षण, उदार हृदय, विनम्र, राष्ट्रभक्त, प्रखर एवं संवेदनशील साहित्यकार है।’’
सर अनिरुद्ध जगन्नाथ
सर अनिरुद्ध जगन्नाथ
महामहिम राष्ट्रपति, माॅरिशस गणराज्य

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