विजन मिशन 2020

किसी भी क्षेत्र में बड़े कार्य की सफलता के लिए एक-दो पहलू अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। सर्वप्रथम हमें रणनीति का सृजन करने की आवश्यकता है और तत्पश्चात उसका सफल क्रियान्वयन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। रणनीति विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है वहीं क्रियान्वयन मिशन के रूप में हमारी सोच को धरातल पर उतारने का माध्यम है, बल्कि उसकी सफलता सुनिश्चित करता है।

उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण एक बड़े जन आंदोलन की परिणति था। राज्य निर्माण एक बड़े उद्देश्य के लिए किया गया। एक ऐसे राज्य की संकल्पना की गई जहाँ उत्तराखण्ड के हर व्यक्ति को आत्म सम्मान और आत्मगौरव का जीवन मिल सके और एक ऐसी पारदर्शी स्वच्छ, संवेदनशील शासन तत्रं का विकास हो जो प्रदेश के दूरस्थ कोने में बैठे अंतिम व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सक्षम हो। उत्तराखण्ड राज्य एक विशेष राज्य है। भारत की संस्कृति, आध्यात्म का प्रतिनिधित्व करता यह प्रदेश हजारों वर्षों से सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। हमारा यह सुन्दर प्रदेश पुनः अपने खोए वैभव को प्राप्त कर सके, समृद्धि, विकास, नियोजन में सर्वश्रेष्ठता हासिल कर सके इस मंतव्य को केन्द्र में रखकर डाॅ0 रमेश पोखरियाल निशंक ने विजन 2020 की आधारशिला रखी। वास्तविकता में विजन 2020 उत्तराखण्ड को भारत के माॅडल स्टेटे बनाने का ब्ल्यू प्रिंट के रूप में तैयार किया गया था। इस विजन का विकास प्रदेश के समक्ष सारी समस्याओं के मंथन पश्चात उन चुनौतियों से समयबद्ध तरीके से निपटने के लिए एक रोडमैप तैयार किए जाने से शुरू हुआ। चाहे वह बेरोजगारी की समस्या हो, पलायन की समस्या हो, ग्रामीण अंचलों को सड़क माध्यम से जोड़ने का प्रश्न हो, चिन्ताजनक आर्थिकी हो, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा हो, शैक्षिक, प्राविधिक और विश्वविद्यालय की कमी हो, महिला सशक्तिकरण का प्रश्न हो, औद्योगिक क्षेत्रा का विकास हो या फिर पर्यावरण संरक्षण हो विजन 2020 में हमने इन समस्याओं के निदान के साथ उत्तराखण्ड को एक सुसंस्कारित, सुसम्पन्न, विकसित और आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ प्रदेश बनाने में सभी का सक्रिया योगदान सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। लक्ष्य प्राप्ति में नौजवानों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कत्र्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी शौर्य, अनुशासन प्रियता और आपसी सहयोग से उत्तराखण्ड को शीर्ष प्रदेश बनाने का संकल्प विजन 2020 का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विजन 2020 में सभी विभागों को समाहित किया गया। जिसमें वित्त नियोजन चिकित्सा स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा, लोक निर्माण, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, सैनिक कल्याण, उद्योग, सिंचाई, पेयजल, आवास शहरी निवास, ग्राम्य विकास कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास, परिवहन नागरिक उड्डयन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति महत्वपूर्ण है।


Ramesh Pokhriyal Nishank Vision 2020

मुख्यमंत्री डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के विजन 2020 के तहत दूरगामी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ हुआ। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन हुआ। यह लक्ष्य रखा गया कि प्रदेश की बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति पर समुचित ध्यान देते हुए राष्ट्रीय विकास दर से अधिक विकास दर के लिए कार्य किया जाए। आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर सृजित कर पलायन की समस्या को रोकने का मुख्य लक्ष्य रखा गया। विजन में इस बात पर बल दिया गया कि शिक्षा चिकित्सा, पेयजल, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को जन सामान्य तक पहुँचाकर उनके जीवन में गुणात्मक सुधार लाने का प्रयास किया जाए। पर्यावरण की दृश्टि से उत्तराखण्ड की संवेदनशीलता के दृष्टिगत प्राकृतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन उनका संरक्षण संवर्द्धन शामिल है।

आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध को महत्व देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जड़ी-बूटी शोध संस्थान के माध्यम से विश्व के हर्बल मार्किट में उत्तराखण्ड ब्रैंड को स्थापित करना मुख्य लक्ष्य रखा गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रदेश की भौगोलिक, परिस्थितियों, विषमताओं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न विधाओं से जुड़े वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, नीति निर्माता, शिक्षाविद, शोध शास्त्री, कुशल तकनीकी मानव संसाधन को जोड़ने की कवायद शुरू की गई। बेमौसमी सब्जी और संकर प्रजाति के बीजों का उत्पादन कर पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना इस विजन का मुख्य लक्ष्य है। आर्गेनिक खेती, फ्लोरीकल्चर, मशरूम उत्पादन, छोटी-छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से जन सहभागिता सुनिश्चित कर जन-जन को विकास की यात्रा से जोड़ने के लिए पंचायत स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की पहल की गई इस बात पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया कि सम्पूर्ण योजनाओं की जानकारी सुलभता से हर घर हर गाँव में उपलब्ध हो ताकि जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हुए डाॅ0 निशंक ने आम आदमी के दुःख-दर्द को न केवल समझा परन्तु उसके कष्ट निवारण को पूरी ताकत झोक दी। मुख्यमंत्री आम जनता के सेवक के रूप में दिन-रात जन सेवा को अपना मिशन बनाकर डाॅ0 निशंक हर व्यक्ति के चेहरे पर खुशहाली के लिए कृतसंकल्प रहे।

उपलब्ध वित्तीय, मानव प्रोद्योगिक एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश की विकास दर में वृद्धि हेतु सटीक नियोजन एवं योजना का क्रियान्वयन-

  • राज्य का कर एवं स्तर राजस्व को विभिन्न राज्यों में सबसे अधिक बनाना।
  • राज्य की विकास दर को देश में सर्वश्रेष्ठ एवं अन्य विकास मानकों को राष्ट्रीय औसत से अधिक लाना।
  • राज्य की प्रतिव्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत से अधिक पहुँचाना। सार्वजनिक निजि क्षेत्र की सहभागिता से प्रदेश की आर्थिक विकास दर एवं जन सुविधा में वृद्धि हेतु अधिक पूंजी निवेश बढ़ाना।
  • निर्माण कार्यों का परियोजना का स्वतंत्र सदस्यों द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण एवं मूल्यांकन सुनिश्चित करना।

Hydro Power in Uttarakhand
  • छोटी जल विद्युत परियोजना के निर्माण में स्थानीय लोगों की सहभागिता।
  • राज्य में संभावित 40 हजार मेगावाट जल विद्युत क्षमता से बिजली उत्पादन करना।
  • पंचवर्षीय योजनाओं के अन्तर्गत अतिरिक्त विद्युत उत्पादन।
  • बी.पी.एल. परिवारों को विद्युत संयोजन निर्गत करना।
  • ग्रामीण विद्युतीकरण हेतु लघु जल विद्युत परियोजना को प्रोत्साहित करना।
  • निर्वाध विद्युत आपूर्ति एवं बिजली चोरी समाप्त कर राजस्व वृद्धि।
  • ऊर्जा संरक्षण हेतु प्रदेश की लाइटों को ऊर्जा बचाने वाली लाइटों में परिवर्तित करना।
  • विश्व पर्यटन संगठन द्वारा गठित उत्तराखंड के लिए मास्टर प्लान के अनुसार सुनियोजित दीर्घकालिक व सतत पर्यटन।
  • राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देना।
  • रेल सुविधाओं का पहाड़ी, क्षेत्रों में विकास।
  • अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना।
  • राज्य की प्राकृतिक सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन एवं संरक्षण।
  • उत्तराखण्ड राज्य को साहसिक पर्यटन, इको टूरिज्म, वन्य जीव पर्यटन व स्थापत्य पर्यटन हेतु अग्रणी पर्यटन प्रदेश के रूप में स्थापित करना।
  • महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों को हेलीकाॅप्टर सेवा से जोड़ना।





Education in Uttarakhand
  • शत प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करना।
  • शत प्रतिशत अनिवार्य एवं निशुल्क प्रारंभिक शिक्षा की सुनिश्चित्ता।
  • माध्यामिक शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण एवं गुणवत्तापरक शिक्षा की व्यवस्था।
  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्थानीय रूप से समन्वित रूप से जिला राज्य स्तर पर विशेष शिक्षा की व्यवस्था।
  • कक्षा शिक्षण एवं अध्यापक प्रशिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी का समावेश कर सभी माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में परिवर्तित किया जाएगा।
  • तकनीकी शिक्षा के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार की कवायद।
  • गरीब विद्यार्थियों के लिए आदर्श छात्रावास की स्थापना।
  • शिक्षा जगत में सार्वभौकिता।
  • गुणवत्तापरक शिक्षा।
  • व्यवसायिक तकनीकी ओद्योगिक जगत से सम्बन्ध स्थापित करना।
  • काॅलेजों महाविद्यालयों विश्वविद्यालयों में संेटर आॅफ एक्सीलेंस।

प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर अत्याधुनिक सुविधा से युक्त 50 शैय्या तहसील, ब्लाॅक स्तर पर 25 शैय्या युक्त आयुष चिकित्सालयों की स्थापना। राज्य में एक यूनानी काॅलेज एवं गढ़वाल/कुमाऊं मंडल में एक-एक आयुर्वेदिक काॅलेज की स्थापना। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक आयुष ग्राम का विधिवत संचालन। आयुर्वेदिक काॅलेजों में द्विवर्षीय स्नातकोत्तर कोर्स प्रारम्भ किया जाना। योग एवं आयुर्वेद में पाठ्यक्रम को प्रारम्भ किया जाना। महर्षि चरक ऋषि की जन्मस्थली चरक डांडा में आयुर्वेद शोध संस्थान की स्थापना शोध के क्षेत्र में प्रोत्साहन देने हेतु आयुष अकादमी की स्थापना।


Yog and Ayurveda in Uttarakhand

भारतीय मूल के 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग जकार्ता, मैदान सुरबाया, बागडुंग में रहते हैं। इसके अतिरिक्त लगभग दस हजार भारतीय विशेषज्ञों के रूप में इंडोनेशिया में कार्य कर रहे हैं। इनमें से अधिकत्तर इंजीनियर, वैज्ञानिक, चार्टड अकाउंटटेंट, बैंकर्स, परामर्शदाता पेशेवर शामिल है। भारतीय कल्चरल फोरम के अधीन 31 सामाजिक संस्थाएं भारतीय संस्कृति के ध्वज वाहक के रूप में अपना कत्र्तव्य बखूबी निभा रहे हैं। कई भारतीय विद्यार्थी इंडोनेशिया में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो कि आने वाले समय में भारत इंडोनेशिया के ब्रांड एम्बैसडर बन कर दोनों देशों की कीर्ति पताका पूरे विश्व में फैलाएंगे। भारत इण्डोनेशिया के बारे में मेरे एक यूरोपियन मित्र ने बताया और मैं इससे काफी सहमत हूँ कि ये जुड़वा देश है।


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